Tuesday, March 10, 2009

Shaam

महफिल-इ-जिंदगी मैं हर शाम नयी है
इतना जानिए
गयी शाम वापस नहीं है

1 comment:

Sangeetha said...

tu 2 lines mein kaise itna kuch bol deta hai re.. awesome :)